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सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता संघर्ष: स्थिति की गंभीरता

सऊदी अरब और हूतियों के बीच हाल के संघर्ष ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब की महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में सऊदी अरब ने बमबारी की है। भारत ने भी इस पर चिंता जताई है। जानें इस संघर्ष के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
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सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता संघर्ष

हाल के हफ्तों में सऊदी अरब और हूतियों के बीच का संघर्ष और भी तीव्र और हिंसक हो गया है। हूतियों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को अपने हमलों का निशाना बनाया है। इसके जवाब में, सऊदी अरब ने यमन में हूतियों के ठिकानों पर लगातार बमबारी की है। एक महत्वपूर्ण घटना में, हूतियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और सऊदी अरब के जहाजों को लेकर धमकियां दीं। 10 अक्टूबर को रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले में 13 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था, जिसकी बाद में मृत्यु हो गई। हाल के दिनों में, सऊदी अरब ने सना में हूतियों के नियंत्रण वाली तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं। इसके जवाब में, हूतियों ने सऊदी तेल कंपनी 'अरामको' की एक इमारत पर हमला किया। इससे पहले, हूतियों ने सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचाया था, जिससे यह पाइपलाइन लगभग दस दिनों तक ठप रही।


भारत की प्रतिक्रिया

सितंबर के मध्य में, सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का के दक्षिण में हूतियों की एक मिसाइल को मार गिराया है। हालांकि, हूतियों ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने मक्का या मदीना को निशाना बनाया था, लेकिन फिर भी उनकी निंदा की गई। इस्लामी दुनिया ने सऊदी अरब के दावे को गंभीरता से लिया। भारत ने भी अन्य देशों के साथ मिलकर हूतियों की आलोचना की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मक्का के पास हुए ड्रोन हमले को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करता है।


अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

अंतरराष्ट्रीय समुदाय सऊदी अरब और हूतियों के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई को लेकर चिंतित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका से दखल देने की मांग की थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। वे 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में व्यस्त हैं। इन चुनावों का परिणाम यह तय करेगा कि अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बना रहेगा या डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल करेंगे।


यमन में स्थिति

यमन के अंसारुल्लाह की बढ़ती ताकत का असर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और प्रतिष्ठा पर पड़ रहा है। हाल ही में, हूतियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हमले किए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने ओमान के माध्यम से हूतियों को एक महीने के लिए सीजफायर का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए।


सऊदी अरब की चुनौतियाँ

सऊदी अरब आज एक जटिल स्थिति का सामना कर रहा है। हूतियों के हमलों के कारण एयरपोर्ट्स और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा प्रभावित हुई है। अंसारुल्लाह के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने यमन के मामलों में दखल देना बंद नहीं किया, तो यह संघर्ष केवल आसमान से गिरती मिसाइलों तक सीमित नहीं रहेगा।