Newzfatafatlogo

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता तनाव: रियाद पर हमले

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। हाल ही में हूती विद्रोहियों ने रियाद पर हवाई हमले किए, जबकि सऊदी एयर डिफेंस ने इन हमलों को नाकाम करने का दावा किया। इस स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशें भी जारी हैं। जानें इस तनाव के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 | 

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हवाई हमले

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। शनिवार को, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर कई हवाई हमले किए। सऊदी अधिकारियों ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने रियाद की ओर भेजे गए दो ड्रोन और खमीज मुशैद की दिशा में दागी गई एक बैलेस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने अपने ऑपरेशन को सफल बताया। इसके साथ ही, आभा और जाजान जैसे क्षेत्रों में हवाई खतरे की चेतावनी जारी की गई।


सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा कि यमन से रियाद की दिशा में दो ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिन्हें सऊदी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर दिया। खमीज मुशैद, जो सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, वहां एक प्रमुख एयरबेस भी है। सऊदी सिविल डिफेंस ने रात के समय आभा और जजान में संभावित हवाई खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया। अधिकारियों ने नागरिकों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और खतरे की स्थिति में घर के अंदर रहने की सलाह दी।


यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब को निशाना बनाया है। इससे पहले, 19 सितंबर को भी रियाद की ओर बैलेस्टिक मिसाइल दागे जाने की सूचना मिली थी।


सऊदी अधिकारियों ने उस समय भी मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की बात कही थी, जबकि हूती विद्रोहियों ने दावा किया था कि उनका ऑपरेशन सफल रहा। हूतियों ने यह भी कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। अंसारुल्लाह के हालिया हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं।


एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के 7 दिन के युद्ध विराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर बमबारी फिर से शुरू करने की उम्मीद जताई है। ईरान के प्रस्ताव में 7 दिन का युद्ध विराम, परमाणु वार्ता फिर से शुरू करना और स्ट्रेट ऑफ होमोस को दोबारा खोलने की मांग की गई थी। इसके बदले में अमेरिका से ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाने की मांग की गई थी।


हालांकि, ट्रंप को संदेह है कि तेहरान अमेरिकी मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करेगा। इस बीच, हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब को निशाना बना रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में हूती हमले केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रभाव लाल सागर, बाबल मंदब और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।


हाल के दिनों में हूतियों की सैन्य गतिविधियों में वृद्धि के साथ, सऊदी ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी है। अमेरिका, ईरान, और हूतियों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ती हुई नजर आ रही हैं। यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो अमेरिकी हमले फिर से शुरू हो सकते हैं। इस प्रकार, यमन और सऊदी अरब में तनाव बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।


हालांकि, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के भविष्य के स्वरूप और समय को लेकर अभी भी अनिश्चितता है। फिलहाल, सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने शहरों और महत्वपूर्ण सैन्य एवं ऊर्जा ठिकानों को ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाना है। अब देखना यह होगा कि हूती विद्रोही आगे क्या कदम उठाते हैं। यमन में युद्ध सऊदी अरब ने शुरू किया है, लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे अंसारुल्लाह। हूतियों के रुख को देखकर ऐसा लगता है कि सऊदी अरब ने गलत पंगा ले लिया है। सऊदी ने 2015 से भी कोई सबक नहीं लिया और यमन में हूतियों पर हमला कर दिया। इसके बाद से हूती अंसारुल्लाह लगातार सऊदी अरब पर हमलावर हैं। हाल ही में यह खबर आई है कि यमन के पश्चिम में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हैस पर हूती जंगजुओं ने फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है।