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सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं: हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए इजरायल से मदद की तलाश

सऊदी अरब के लिए हूती विद्रोहियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते रियाद ने इजरायल से खुफिया सहयोग की संभावनाएं तलाशना शुरू कर दिया है। मक्का रक्षा समझौते के बावजूद पाकिस्तान से सैन्य सहायता की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानें कैसे सऊदी अरब विभिन्न देशों से मदद की कोशिश कर रहा है और इजरायल के साथ संभावित सुरक्षा सहयोग की चर्चा हो रही है।
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रियाद के सामने बढ़ता खतरा


नई दिल्ली: सऊदी अरब के लिए हूती विद्रोहियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रियाद ने अपने सहयोगियों से सहायता की उम्मीद की थी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सीधे सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। इस बीच, सऊदी अरब ने हूती खतरे से निपटने के लिए इजरायल से खुफिया सहयोग की संभावनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है।


मक्का रक्षा समझौते के बावजूद अनिश्चितता

अगस्त में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में यह कहा गया था कि यदि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होता है, तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा, और तीनों देश सामूहिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे।


हूती हमलों के बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि यदि सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं, तो यह समझौता सक्रिय हो सकता है। हालांकि, इस बयान के बावजूद रियाद को यमन में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।


इजरायल से सहयोग की उम्मीद

इसलिए, सऊदी अरब अब अन्य विकल्पों की तलाश कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, रियाद ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के माध्यम से इजरायल से हूती गतिविधियों से संबंधित खुफिया जानकारी और सुरक्षा सहयोग मांगा है। क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने दोनों पक्षों के बीच संपर्क की पुष्टि की है।


दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी हूती खतरे ने दोनों देशों के बीच सीमित सुरक्षा संपर्क की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है।


हूती हमलों से बढ़ी चिंताएं

यमन के हूती लड़ाकों की गतिविधियां अब लाल सागर और बाब अल-मंदेब क्षेत्र तक फैल चुकी हैं। सऊदी अरब के शहरों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरें भी आई हैं, जिससे रियाद की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।


ऐसे हालात में, सऊदी अरब कई देशों से मदद लेने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सहयोग मुख्य रूप से खुफिया जानकारी और लक्षित सहायता तक सीमित है, जबकि इजरायल से संभावित खुफिया सहयोग एक नया और संवेदनशील पहलू बनकर उभरा है। यह ध्यान देने योग्य है कि जिस इजरायल के साथ सऊदी अरब के औपचारिक रिश्ते नहीं हैं, वही अब हूती खतरे के बीच रियाद के लिए संभावित सुरक्षा सहयोगी बन रहा है।