Newzfatafatlogo

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का हमला: क्या है स्थिति?

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला किया है, जिसमें अरामको का मुख्यालय शामिल है। इस हमले के बाद सऊदी सेना ने नागरिकों को चेतावनी दी है। क्या यह संघर्ष और भी गंभीर मोड़ लेगा? अमेरिका भी इस स्थिति से चिंतित है। जानें इस संघर्ष का क्या प्रभाव पड़ेगा और सऊदी अरब की तैयारी कैसी है।
 | 

सऊदी अरब की चिंता का नया अध्याय

सऊदी अरब का सबसे बड़ा डर अब वास्तविकता बन चुका है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से पर हमला किया है, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का मुख्यालय शामिल है। क्या यमन का संघर्ष अब और भी गंभीर मोड़ लेगा? यदि हां, तो क्या सऊदी अरब इस नई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है? हूतियों के पास कौन से हथियार हैं और क्या वे सऊदी अरब को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं? सऊदी सेना ने नागरिकों को सना में एक पेट्रोलियम साइट को खाली करने की चेतावनी दी है। सना, यमन की राजधानी है, जिसे 2014 में हूतियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। चेतावनी के बाद हमले शुरू हो गए, और सना में एक बड़े धमाके की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें आग की लपटें आसमान की ओर उठती दिख रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाज़िल शहर की तस्वीरें उपलब्ध हैं।


हूती मिसाइल का अरामको पर हमला

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई एक मिसाइल, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी 'अरामको' की धहरान स्थित एक इमारत से टकरा गई। यह घटना रात के समय हुई, जब सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी सना के पास एक ईंधन डिपो पर हमला किया था। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि हूती हमले के कारण अरामको के मुख्यालय परिसर की एक प्रशासनिक इमारत में आग लग गई। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि कई अन्य स्थानों पर मिसाइलों और ड्रोन को रोका गया, और रियाद में मलबे के गिरने से चार लोग घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने अरामको और रियाद हवाई अड्डे को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि गठबंधन ने यमन पेट्रोलियम कंपनी की 'अल-सबाहा' सुविधा पर हमला किया था। ईरान समर्थित इस समूह ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी हमले किए जा सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की निदेशक ने कहा कि यह बढ़ता संघर्ष "हर जगह, हर किसी के लिए नकारात्मक परिणाम" ला सकता है।


अमेरिका की चिंता

यमन में पहले भी लंबे संघर्ष हो चुके हैं, और यमनी आर्म फोर्स ने जमीन के नीचे सुरंगों का निर्माण किया है। सऊदी एयरफोर्स ने खुद को लंबे लक्ष्यों के लिए तैयार किया था, लेकिन यमन के साथ उनका सामना इस तरह का नया अनुभव है। 13 जुलाई को सऊदी ने ईरान में जनाजे से लौट रहे अंसारुल्लाह के डेलीगेशन वाले ईरानी प्लेन पर हमला किया था। इससे यह संकेत मिलता है कि यदि सऊदी जंग शुरू करता है, तो अंसारुल्लाह का तख्ता पलट होना संभव है। लेकिन अब स्थिति गंभीर है। सऊदी के एयरपोर्ट पर अंसारुल्लाह की मिसाइलें गिर रही हैं, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। अमेरिका भी इस स्थिति से चिंतित है।


हूती विद्रोहियों की नई रणनीति

अंसारुल्ला के हूती लड़ाकों ने सऊदी समर्थित सेना की खंदकों पर अनगाइडेड बमों की बौछार की है। ये बम सीधे सैकड़ों फीट की ऊंचाई से गिरते हैं, जिससे सऊदी सैनिकों में हड़कंप मच जाता है। सऊदी समर्थित फौजें अपने बंकरों और ठिकानों को छोड़कर भागती नजर आ रही हैं। यमन में भी हूतियों के ठिकानों पर सऊदी एयरफोर्स द्वारा बमबारी की जा रही है। हूतियों की नई ड्रोन वॉरफेयर रणनीति ने साबित कर दिया है कि सऊदी समर्थित सेना अब जमीन पर पूरी तरह से बेबस है।