सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों की बढ़ती चुनौती: अमेरिका से सैन्य सहायता की मांग
सऊदी अरब में अफरा-तफरी का माहौल
लाल सागर में यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने सऊदी अरब की शासन व्यवस्था में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की। उन्होंने हूती विद्रोहियों के बाब-अल-मंडेब की ओर बढ़ने पर कार्रवाई करने का आग्रह किया, लेकिन ट्रंप ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। यह जानकारी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी है।
एमबीएस की ट्रंप से बातचीत
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, एमबीएस ने ट्रंप को पहला फोन तब किया जब हूती विद्रोही मोखा की दिशा में बढ़ रहे थे। उन्होंने यमन में बिगड़ते हालात की जानकारी दी। कुछ घंटों बाद, एमबीएस को फिर से ट्रंप से संपर्क करना पड़ा, इस बार उन्होंने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य सहायता की मांग की। रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रंप ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से मना कर दिया।
अमेरिका का अप्रत्यक्ष सहयोग
अमेरिका ने अप्रत्यक्ष सहयोग बढ़ाया
अमेरिका ने सऊदी अरब को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने पर सहमति जताई है। गुरुवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर सऊदी अरब पहुंचे और यहां समन्वय बैठक में भाग लिया। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ खुफिया जानकारी और लक्ष्यों से संबंधित डेटा रियाद के साथ साझा करता रहेगा। इसके अलावा, 200 अमेरिकी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं।
अमेरिका का हूती विद्रोहियों से बचने का कारण
हूतियों से क्यों बच रहा अमेरिका?
अमेरिका हूती विद्रोहियों के साथ सीधे टकराव के मूड में नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने हाल ही में सऊदी अरब को सूचित किया कि राष्ट्रपति ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि एक और युद्ध का मोर्चा खोला जाए।
सऊदी अरब की सैन्य सहायता की आवश्यकता
सऊदी को क्यों मांगनी पड़ी सैन्य सहायता?
जुलाई में अमेरिका ने सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य सहायता की पेशकश की थी, लेकिन उस समय रियाद ने यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह खुद ही इस समस्या का समाधान कर सकता है। अब, लाल सागर के किनारे यमन के पूरे तट और बाब अल-मंडेब के महत्वपूर्ण द्वीपों पर कब्जे के बाद, सऊदी अरब में हड़कंप मच गया है। इस स्थिति में एमबीएस को अमेरिका से सैन्य सहायता मांगने की आवश्यकता महसूस हुई।
