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सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मिली मृत्युदंड की सजा: जानिए क्यों?

दमिश्क की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उनके शासन के पतन के बाद आया है और इसमें उनके चचेरे भाई आतिफ नजीब को भी सजा दी गई है। असद के शासन के दौरान हुए युद्ध अपराधों और रासायनिक हमलों की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। जानें इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे की कहानी और सीरिया की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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सीरिया में ऐतिहासिक फैसला


नई दिल्ली: दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उनके द्वारा मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों और युद्ध अपराधों के लिए दिया गया है, जो उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक अपने तानाशाही शासन में किए। यह असद के खिलाफ सीरियाई न्यायिक प्रणाली द्वारा सुनाया गया पहला बड़ा निर्णय है, जो दिसंबर 2024 में उनके शासन के पतन के बाद आया है। जब विद्रोही बल दमिश्क के करीब पहुंचे, तब असद अपने परिवार के साथ मॉस्को भाग गए थे।


आतिफ नजीब को भी मिली सजा

रिश्तेदार आतिफ नजीब को भी सजा-ए-मौत


अदालत ने बशर अल-असद के चचेरे भाई आतिफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई है। नजीब पर जानबूझकर हत्याएं करने और हिरासत में यातनाएं देने के गंभीर आरोप साबित हुए हैं। मुकदमा उनके सामने ही चला और फैसला सुनाया गया।


पिता से मिली सत्ता की विरासत

पिता से विरासत में मिली सत्ता


बशर अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद सत्ता संभाली थी, जिन्होंने लगभग तीन दशकों तक सीरिया पर शासन किया। 2011 में दरआ शहर में असद सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुए, जिन्हें सुरक्षा बलों ने बर्बरता से दबाया। यह दमन बाद में एक भयानक गृहयुद्ध में बदल गया, जिसने देश को तबाह कर दिया और लाखों लोगों की जान ले ली।


रासायनिक हमलों का काला सच

रासायनिक हमलों और गुप्त प्रताड़ना गृहों का काला सच


अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, असद सरकार पर नागरिकों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का उपयोग करने, अवैध हत्याएं करने और गुप्त हिरासत में रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) ने 2013 में पूर्वी गुटा में हुए सरीन गैस हमले के लिए असद की सेना को जिम्मेदार ठहराया था। इसके अलावा, सीरियाई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे प्रताड़ना केंद्रों में हजारों कैदियों को बर्बर यातनाएं देकर मार डाला गया।