सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा का न्यूयॉर्क दौरा: क्या बदलेंगे रिश्ते?
अहमद अल-शरा का ऐतिहासिक न्यूयॉर्क दौरा
नई दिल्ली: जिस व्यक्ति को अमेरिका ने पहले वैश्विक आतंकवाद की सूची में डालकर 1 करोड़ डॉलर का इनाम रखा था, वही अब एक राष्ट्राध्यक्ष के रूप में न्यूयॉर्क पहुंच चुका है। सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका आए हैं, अपने साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल लेकर आए हैं। उनके साथ सीरियाई विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी और आपातकाल व आपदा प्रबंधन मंत्री राएद अल-सालेह भी शामिल हैं। अल-शरा महासभा के हाई-लेवल जनरल डिबेट में सीरिया को फिर से वैश्विक मंच पर लाने के प्रयासों के तहत अपनी बात रखेंगे।
अमेरिका की हिट लिस्ट में अहमद अल-शरा
अहमद अल-शरा का अतीत
अहमद अल-शरा का अतीत इस यात्रा को विशेष बनाता है। पहले उन्हें 'अबू मोहम्मद अल-जुलानी' के नाम से जाना जाता था और वे हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के प्रमुख थे। अमेरिका ने लंबे समय तक 'रिवॉर्ड फॉर जस्टिस' कार्यक्रम के तहत उनके लिए 1 करोड़ डॉलर का इनाम रखा था, लेकिन दिसंबर 2024 में बातचीत के बाद इस इनाम को आगे बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री से वार्ता
मार्को रुबियो से मुलाकात
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान, सीरियाई राष्ट्रपति अल-शरा 22 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से औपचारिक बातचीत करेंगे। इस बैठक में सीरिया की सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक पुनर्निवेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या न्यूयॉर्क में अल-शरा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई मुलाकात होगी। हालांकि, अभी तक ट्रंप और अल-शरा के बीच किसी आधिकारिक बैठक का कार्यक्रम तय नहीं किया गया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों नेताओं का आमना-सामना संभव है।
सीधी कूटनीतिक बातचीत का इतिहास
पहले भी हो चुकी है बातचीत
यह पहली बार नहीं है जब अहमद अल-शरा और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधी बातचीत हो रही है। इससे पहले, दोनों नेताओं की व्हाइट हाउस में भी मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा, तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों ने द्विपक्षीय संवाद किया था। एक समय का वांछित आतंकवादी अब वाशिंगटन के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधे संवाद कर रहा है, जो मध्य पूर्व के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है।
